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क्या है सामाजिक न्याय ?

क्या हमने कभी किसी को उसके समुदाय के आधार पर अलग समझा ? जब कभी किसी व्यक्ति विशेष को उसके रंग, भेषभूषा, रहन सहन, जाति, लिंग आदि के आधार उससे दूरी बनाते हैं या दूरी बनाने की कोशिश करते हैं तो यह उस व्यक्ति के साथ अन्याय होता है,हम अपने इसी व्यवहार की वजह उस व्यक्ति को समाज से दूर कर देते हैं या ये कहें ही हम उसके साथ सामाजिक रूप से न्याय नहीं करते हैं। जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए । उपरोक्त किसी भी आधार पर भेदभाव न करना ही सामाजिक न्याय है।